भुवनेश्वर कुमार की टीम इंडिया में वापसी से बढ़ी हलचल, क्या 2028 के लिए अभी से बन रही रणनीति?
punjabkesari.in Thursday, Oct 08, 2026 - 05:14 PM (IST)
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की करीब चार साल बाद वापसी ने चयनकर्ताओं की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए 36 वर्षीय भुवनेश्वर को भारतीय टीम में शामिल किया गया है। उन्होंने भारत की ओर से अपना पिछला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नवंबर 2022 में खेला था। अब लंबे अंतराल के बाद उनकी वापसी को सिर्फ मौजूदा सीरीज तक सीमित फैसला माना जाए या इसके पीछे भविष्य की कोई बड़ी योजना है, इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
भारतीय क्रिकेट के लिहाज से 2028 बेहद अहम साल होने वाला है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में टी20 विश्व कप का आयोजन होना है, जबकि लॉस एंजिलिस ओलंपिक में भी क्रिकेट की वापसी होगी। ओलंपिक में भी टी20 फॉर्मेट ही खेला जाएगा। ऐसे में भुवनेश्वर की वापसी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चयनकर्ता अगले दो वर्षों में अनुभव और युवा प्रतिभा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं?
2028 में 38 साल के हो जाएंगे भुवनेश्वर
भुवनेश्वर कुमार इस समय 36 वर्ष के हैं और 2028 में उनकी उम्र 38 साल हो जाएगी। ऐसे में उनके लिए दो साल बाद होने वाले बड़े टूर्नामेंटों तक भारतीय टीम की योजनाओं में बने रहना फिटनेस और प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। भुवनेश्वर की सबसे बड़ी ताकत नई गेंद से स्विंग कराने की क्षमता रही है। इसके अलावा डेथ ओवरों में धीमी गेंद और अन्य विविधताओं का इस्तेमाल करने में भी वह माहिर रहे हैं। हालांकि, आधुनिक टी20 क्रिकेट में सिर्फ अनुभव काफी नहीं है। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए फिटनेस, गति और परिस्थितियों के अनुसार गेंदबाजी में बदलाव करना भी जरूरी है। चयनकर्ताओं के सामने इसलिए दोहरी चुनौती है। उन्हें ऐसे गेंदबाज चाहिए जो मौजूदा मुकाबलों में परिणाम दे सकें और साथ ही आने वाले वर्षों के लिए तेज गेंदबाजी का मजबूत विकल्प भी तैयार करना होगा।
IPL 2026 में भुवनेश्वर ने दिखाया दम
भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी की सबसे बड़ी वजह उनके आईपीएल 2026 का प्रदर्शन माना जा रहा है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेलते हुए उन्होंने 28 विकेट हासिल किए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर रहे। इस दौरान उनकी इकॉनमी रेट 7.95 रही। इस प्रदर्शन ने दिखाया कि उम्र बढ़ने के बावजूद भुवनेश्वर की विकेट लेने की क्षमता अभी बरकरार है। खासकर पावरप्ले में गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की उनकी काबिलियत टीम इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में काफी अंतर है। न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में भुवनेश्वर कितना प्रभाव छोड़ते हैं, यह उनकी वापसी की असली परीक्षा होगी।
IPL के प्रदर्शन के बाद वापसी का दांव हमेशा नहीं रहा सफल
भारतीय क्रिकेट में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जब खिलाड़ियों ने आईपीएल या घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद टीम इंडिया में वापसी की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। दिनेश कार्तिक इसका एक उदाहरण हैं। आईपीएल 2022 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए उन्होंने 16 मैचों में 330 रन बनाए थे। उनका औसत 55 और स्ट्राइक रेट 183.33 रहा था। इसके बाद उन्हें ऑस्ट्रेलिया में खेले गए 2022 टी20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में जगह मिली। उन्हें फिनिशर की भूमिका दी गई, लेकिन टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
करुण नायर की वापसी भी इसी तरह चर्चा में रही। 2017 में अपना आखिरी टेस्ट खेलने के बाद उन्होंने जून 2025 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टेस्ट टीम में वापसी की। घरेलू क्रिकेट में अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्हें टीम में शामिल किया गया था, लेकिन चार टेस्ट की आठ पारियों में वह 205 रन ही बना सके। उनका औसत 25.62 रहा और उनके बल्ले से सिर्फ एक अर्धशतक निकला। इन उदाहरणों से यह साफ है कि घरेलू या फ्रेंचाइजी क्रिकेट का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता की गारंटी नहीं देता। हालांकि, भुवनेश्वर की स्थिति अलग हो सकती है, क्योंकि न्यूजीलैंड की परिस्थितियां स्विंग गेंदबाजी के लिए अनुकूल मानी जाती हैं और उनके पास वहां खेलने का अच्छा अनुभव भी है।
मोहम्मद कैफ ने 2028 की चर्चा को बताया जल्दबाजी
भुवनेश्वर कुमार की वापसी को 2028 के टी20 विश्व कप या लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारी से जोड़ने पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने सावधानी बरतने की बात कही है। कैफ के मुताबिक, अभी भुवनेश्वर का चयन न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए हुआ है। इसलिए पहले यह देखना जरूरी है कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के बाद किस तरह का प्रदर्शन करते हैं। अभी से यह मान लेना कि उन्हें 2028 के बड़े टूर्नामेंटों के लिए तैयार किया जा रहा है, जल्दबाजी होगी। दो साल के दौरान टीम की जरूरतें बदल सकती हैं। भुवनेश्वर की फिटनेस कैसी रहती है, युवा तेज गेंदबाज किस तरह का प्रदर्शन करते हैं और टीम मैनेजमेंट की रणनीति क्या होती है, इन सभी चीजों का असर उनके भविष्य पर पड़ेगा।
युवा गेंदबाजों के प्रदर्शन ने भी बढ़ाई भुवनेश्वर की अहमियत
भुवनेश्वर की वापसी को सिर्फ उनके आईपीएल प्रदर्शन से जोड़कर देखना भी पूरी तस्वीर नहीं होगी। भारतीय टीम ने हाल के समय में कई युवा तेज गेंदबाजों को मौके दिए हैं, लेकिन उनमें से कुछ खिलाड़ी निरंतर प्रदर्शन करने में सफल नहीं रहे। ऐसे में चयनकर्ताओं के लिए अनुभवी और भरोसेमंद विकल्प की जरूरत महसूस होना स्वाभाविक है। भुवनेश्वर इस भूमिका में फिट बैठते हैं। नई गेंद से विकेट निकालने के साथ-साथ उनके पास मुश्किल परिस्थितियों में गेंदबाजी करने का लंबा अनुभव है।
अगरकर के बाद चयन नीति में बदलाव के संकेत?
भुवनेश्वर कुमार की वापसी को चयन समिति की सोच में बदलाव के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। अजीत अगरकर के मुख्य चयनकर्ता पद से हटने के बाद प्रज्ञान ओझा को अंतरिम तौर पर चयन समिति की जिम्मेदारी मिली है। न्यूजीलैंड दौरे के लिए भारतीय टीम का चयन उनके नेतृत्व में किया गया। मोहम्मद कैफ के आकलन के मुताबिक, भुवनेश्वर की वापसी से यह संकेत मिल सकता है कि चयनकर्ता अब केवल युवा खिलाड़ियों पर निर्भर रहने के बजाय फॉर्म में चल रहे अनुभवी खिलाड़ियों को भी मौका देने के लिए तैयार हैं।
न्यूजीलैंड सीरीज में तय होगी भुवनेश्वर की आगे की राह
करीब चार साल बाद टीम इंडिया में लौटे भुवनेश्वर कुमार के लिए न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज बेहद अहम रहने वाली है। यह सीरीज उनके लिए खुद को दोबारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित करने का मौका होगी। अगर वह नई गेंद से विकेट निकालने के साथ डेथ ओवरों में भी प्रभावी रहते हैं, तो आने वाली टी20 सीरीज में उनकी दावेदारी मजबूत हो सकती है। वहीं, अगर प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा तो चयनकर्ताओं के पास युवा तेज गेंदबाजों की ओर लौटने का विकल्प मौजूद रहेगा। फिलहाल भुवनेश्वर की वापसी को 2028 की सीधी तैयारी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि उनकी वापसी ने भारतीय टी20 टीम में अनुभव और युवा प्रतिभा के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

