''चकिंग के आरोप'' ने अनिल कुंबले को तेज गेंदबाज से बना दिया महान लेग स्पिनर

punjabkesari.in Thursday, Jun 18, 2026 - 03:19 PM (IST)

नई दिल्ली : भारत के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने याद किया कि कैसे किशोरावस्था में उनके बॉलिंग एक्शन पर उठे सवालों ने उन्हें तेज गेंदबाजी छोड़ने और अचानक लेग स्पिन अपनाने पर मजबूर कर दिया, एक ऐसा फैसला जिसने आगे चलकर उनके शानदार करियर को नई पहचान दी। कुंबले ने बताया कि स्कूल और क्लब क्रिकेट खेलते समय वे मुख्य रूप से तेज गेंदबाज थे, लेकिन एक सीनियर खिलाड़ी ने उनके बॉलिंग एक्शन पर सवाल उठाए। 

कुंबले ने दूरदर्शन के 'द ग्रेट इंडियन क्रिकेट शो' पर कहा, 'मेरे क्लब के एक सीनियर खिलाड़ी ने मेरे कोच से मुझे बॉलिंग करने से रोकने के लिए कहा क्योंकि उन्हें लगा कि मैं अपनी कोहनी मोड़ रहा हूं। सच कहूं तो मुझे पता भी नहीं चला कि मैं कोहनी मोड़ रहा हूं। मैं वैसे ही बॉलिंग कर रहा था जैसा मुझे स्वाभाविक लगता था। उस समय मैं लगभग 13-14 साल का था और शायद उतना मजबूत नहीं था।' 

इस आरोप के कारण युवा कुंबले को कर्नाटक अंडर-15 सिलेक्शन ट्रायल से कुछ हफ़्ते पहले ही कोई दूसरा विकल्प तलाशना पड़ा। तेज गेंदबाजी जारी न रख पाने के कारण उन्होंने अपने भाई से सलाह ली जिन्होंने टीम में चुने जाने की संभावना बढ़ाने के लिए लेग स्पिन आज़माने का सुझाव दिया। 

कुंबले ने कहा, 'फिर मुझे अंडर-15 सिलेक्शन ट्रायल का मौका मिला, जो एक-दो महीने दूर था। तब तक मैं तेज गेंदबाजी नहीं कर सकता था क्योंकि लोग पहले ही कह रहे थे कि मैं 'चकिंग' करता हूं। मेरे भाई ने मुझसे कहा, 'लेग स्पिन आजमाओ, ज्यादा लोग ऐसा नहीं करते, शायद तुम्हें मौका मिल जाए।' तब मुझे लेग स्पिन के बारे में ज़्यादा पता भी नहीं था। मैंने बी.एस. चंद्रशेखर का नाम सुना था, लेकिन टेलीविजन आम नहीं था और मैंने उन्हें मैचों में बॉलिंग करते हुए नहीं देखा था।' 

कुंबले ने माना कि उन्होंने बिना किसी खास तकनीकी समझ और बिना किसी औपचारिक कोचिंग के इस नई शैली को अपनाया। किताबी लेग-स्पिन सीखने के बजाय उन्होंने ऑफ-स्पिन बॉलिंग से मिली ग्रिप का इस्तेमाल करते हुए खुद ही प्रयोग करके इसे सीखा। 

उन्होंने कहा, 'असल में जब मैंने पहली बार असली क्रिकेट बॉल उठाई थी, तो मैंने ऑफ-स्पिन ग्रिप से बॉलिंग की थी। इसलिए, जब मुझे लेग-स्पिन बॉलिंग करने के लिए कहा गया, तो मैंने बस अपनी ऑफ-स्पिन ग्रिप का इस्तेमाल किया, बॉल को घुमाने की कोशिश की और लेग-स्पिन बॉलिंग की। मेरे पास कोई कोच नहीं था जो मुझे बताता कि बॉल को कैसे पकड़ना है या कैसे छोड़ना है; मैंने बस खुद ही ऐसा किया। एक-दो महीने बाद कर्नाटक अंडर-15 ट्रायल्स में मेरा सिलेक्शन हो गया। इसके बाद मैंने कर्नाटक अंडर-15 के लिए खेला।' 

उस सिलेक्शन ने एक शानदार सफर की शुरुआत की। आलोचना की वजह से मजबूरी में किए गए उस बदलाव ने आखिरकार एक ऐसे करियर की नींव रखी जिसमें कुंबले ने टेस्ट क्रिकेट में 619 विकेट लिए, टेस्ट की एक पारी में सभी 10 विकेट लेने वाले दूसरे बॉलर बने और भारत के सबसे महान क्रिकेटरों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई। 


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Content Writer

Sanjeev

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