CWG 2026: जूडो में गोल्ड जीतने वाली अस्मिता डे का बयान, ''मेरा छोटा लक्ष्य पूरा हो गया''
punjabkesari.in Wednesday, Aug 12, 2026 - 02:31 PM (IST)
अगरतला: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो का गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली भारत की अस्मिता डे ने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, निरंतरता और अनुशासन को दिया है। त्रिपुरा सरकार की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में अस्मिता ने कहा कि पदक जीतने का उनका तत्काल लक्ष्य पूरा हो गया है, लेकिन अभी उनके कई और लक्ष्य बाकी हैं।
'मेरा छोटा लक्ष्य पूरा हो गया'
अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग के फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वाच को गोल्डन स्कोर में हराकर स्वर्ण पदक जीता था। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का जूडो में पहला गोल्ड मेडल था। अपनी उपलब्धि पर अस्मिता ने कहा, 'मैं कहना चाहती हूं कि जिस लक्ष्य के लिए मैं काम कर रही थी, यानी पदक जीतना, वह पूरा हो गया है। अभी मुझे कई और लक्ष्य हासिल करने हैं, लेकिन फिलहाल मेरा छोटा लक्ष्य पूरा हो गया है।'
कड़ी मेहनत और अनुशासन का मिला इनाम
अस्मिता ने अपनी ऐतिहासिक जीत के पीछे कड़ी मेहनत के साथ निरंतरता और अनुशासन को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि इन तीनों चीजों ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, 'इसे हासिल करने के लिए बहुत मेहनत, निरंतरता और अनुशासन की जरूरत थी। ये सभी चीजें जरूरी थीं। इसी वजह से मैंने आज यह पदक जीता है।'
गोल्ड के बाद त्रिपुरा में हुआ भव्य स्वागत
कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन के बाद भारत लौटने और अपने गृह राज्य त्रिपुरा पहुंचने पर अस्मिता डे का अगरतला में जोरदार स्वागत किया गया। महाराजा बीर बिक्रम (MBB) एयरपोर्ट पर सैकड़ों प्रशंसक, खेल प्रेमी और शुभचिंतक उनके स्वागत के लिए पहुंचे। इस दौरान समर्थकों ने तालियां बजाकर अस्मिता का उत्साह बढ़ाया और देश तथा त्रिपुरा का नाम रोशन करने के लिए उन्हें बधाई दी। उनकी उपलब्धि से राज्य के खेल जगत में भी खासा उत्साह देखने को मिला।
त्रिपुरा के युवा खिलाड़ियों के लिए बनीं प्रेरणा
अस्मिता की सफलता को त्रिपुरा के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा के तौर पर देखा जा रहा है। राज्य सरकार और खेल विभाग ने भी खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक अवसर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई है। अस्मिता का जूडो गोल्ड न सिर्फ उनके करियर की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि त्रिपुरा और भारतीय जूडो के लिए भी ऐतिहासिक पल है।
भारत के जूडो अभियान को मिली मजबूती
अस्मिता के गोल्ड के अलावा हरश सिंह ने भी स्वर्ण पदक जीता, जबकि यामिनी मौर्य ने सिल्वर और उन्नति शर्मा ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इन चार पदकों के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की जूडो पदक संख्या चार हो गई।

