फीफा विश्व कप : 28 साल के लंबे अंतराल के बाद वर्ल्ड कप में वापसी, रातों-रात इस मुकाम तक नहीं पहुंचा नॉर्वे
punjabkesari.in Friday, Jul 10, 2026 - 03:00 PM (IST)
स्पोर्ट्स डेस्क : नॉर्वे के पूर्व मिडफिल्डर मोर्टन गैमस्ट पेडरसन के मुताबिक नॉर्वे हमेशा 'लगभग' वाली टीम रही है। लेकिन 'लगभग' कभी काफी नहीं होता। उन्हें यह बात अच्छी तरह पता है। पेडरसन ने नॉर्वे के लिए 83 मैच खेले और तीन अलग-अलग वर्ल्ड कप क्वालिफाइंग कैंपेन (2006, 2010, 2014) देखे, जो सभी एक ही तरह से खत्म हुए, बहुत कम अंतर से चूककर। इस बार कोई 'लगभग' वाली बात नहीं थी। नॉर्वे ने ब्राजील के जबरदस्त फिनिश को रोका - हालैंड का दूसरा गोल 90वें मिनट में आया और फिर नेमार ने स्टॉपेज टाइम में एक गोल किया और पहली बार वर्ल्ड कप क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। इससे पहले वे 28 साल पहले वर्ल्ड कप में खेले थे। उन्होंने 8 में से 8 क्वालिफाइंग मैच जीते और 37 गोल किए, जो दुनिया की किसी भी दूसरी टीम से आठ ज्यादा थे।
उस व्यक्ति से ज्यादा गर्व किसी को नहीं हो सकता जिसने अपना करियर नॉर्वेजियन फुटबॉल की 'लगभग-चूक' वाली निराशाओं के बीच बिताया हो। वह इसका श्रेय टीम की एकजुटता को देते हैं। पेडरसन ने कहा, 'यह फुटबॉलरों की एक अविश्वसनीय पीढ़ी है। बेशक एर्लिंग एक सुपरस्टार हैं, जो आसानी से गोल करते हैं और फिर उस पर हंसते हैं। लेकिन वह टीम के बाकी खिलाड़ियों की तरह ही एक विनम्र व्यक्ति भी हैं।'
पेडरसन - जो हालैंड के 'लास्ट 16' में किए गए दो गोल से पहले, एक फ्रेंडली मैच में ब्राजील के खिलाफ गोल करने वाले आखिरी नॉर्वेजियन थे, ने एक इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि कि टैलेंट से भरी इस टीम (हालैंड, मार्टिन ओडेगार्ड, अलेक्जेंडर सोरलोथ) में किसी ने भी खुद को टीम से बड़ा नहीं समझा। उन्होंने कहा, 'यही उनकी सुपर-पावर है। इस टीम को देखकर ऐसा लगता है जैसे यह लड़कों की कोई छुट्टी हो।'
यह एकजुटता घर तक भी पहुंच गई है और वह भी ऐसे रूप में जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। सपोर्टर्स क्लब 'ओल्जेबर्गेट' ने अमेरिका में स्टैंड्स से 'वाइकिंग रो' (Viking Row) को एक ग्लोबल सेलिब्रेशन में बदल दिया और नॉर्वे में भी यही अंदाज रिटायरमेंट होम, एयरपोर्ट, बच्चों की नर्सरी और यहां तक कि मिलिट्री बेस तक फैल गया। इसके असर का सबसे साफ उदाहरण हाल ही में ओस्लो के कार्ल जोहान्स गेट पर देखने को मिला, जहां लगभग 1,00,000 लोग रॉयल पैलेस के सामने एक साथ बैठकर 'रोइंग' (नाव चलाने जैसा मूवमेंट) करने लगे।
बीच में ही क्राउन प्रिंस हाकोन महल से बाहर आए और उनके साथ शामिल हो गए, शाही परिवार के सदस्य और आम लोग कंधे से कंधा मिलाकर एक ही मजेदार और खुशी भरी हरकत एक साथ कर रहे थे। पेडरसन ने कहा, 'घर पर बहुत उत्साह का माहौल है। वे हाल ही में टीम का समर्थन करने के लिए अमेरिका गए थे और इंग्लैंड के साथ होने वाले क्वार्टर-फाइनल मैच के लिए फिर से यात्रा करेंगे।'
यह सब अचानक नहीं हुआ। पेडरसन इसका कुछ श्रेय फीफा (FIFA) द्वारा टीमों की संख्या बढ़ाकर 48 करने को देते हैं, लेकिन इसकी असली वजह नॉर्वे फुटबॉल एसोसिएशन (जिसे स्थानीय रूप से नॉर्वेजियन 'Norges Fotballforbund' या NFF के नाम से जाना जाता है) के भीतर पिछले दो दशकों से चल रही प्रक्रिया है।
इसकी शुरुआत छह साल के बच्चों से शुरू होती है। इसमें उम्र के हिसाब से एक पब्लिश्ड करिकुलम (पाठ्यक्रम) है, जिसे कोच और क्लबों के लिए डिटेल्ड चैप्टर्स में बांटा गया है। इसमें न सिर्फ फॉर्मेट बताया गया है, बल्कि यह भी बताया गया है कि हर स्टेज पर किस चीज पर ध्यान देना है। छह और सात साल के बच्चे 'थ्री-ए-साइड' (तीन-तीन खिलाड़ियों वाली टीम) गेम खेलते हैं, ताकि उन्हें बॉल के साथ ज्यादा समय बिताने का मौका मिले। आठ और नौ साल के बच्चे 'फाइव-ए-साइड' (5-5 खिलाड़ियों वाली टीम) गेम की ओर बढ़ते हैं, जहां पासिंग पर जोर दिया जाता है, और वहां से यह प्लान हर स्टेज पर आगे बढ़ता रहता है।
UEFA के आंकड़ों के अनुसार 2011 से अब तक 17,000 से ज्यादा कोच नॉर्वे का पूरा ग्रासरूट कोचिंग प्रोग्राम पूरा कर चुके हैं और लगभग 2000 कोच UEFA B डिप्लोमा भी पूरा कर चुके हैं। इस दौर के सबसे ऊपर 'लैंडस्लाग्सकोलेन' (Landslagsskolen) है, जो 12 से 16 साल के खिलाड़ियों के लिए नेशनल टीम स्कूल है। इसे 18 फुटबॉल जिलों में फैले 1800 क्लबों से खिलाड़ी मिलते हैं, और हर क्लब एक स्टैंडर्डाइज्ड डेवलपमेंट सिस्टम के तहत टैलेंट को नॉमिनेट करता है।
मौजूदा स्क्वाड के कई खिलाड़ी इसी सिस्टम से निकलकर आए हैं। पेडरसन का कहना है कि इस प्रोसेस के दौरान, फेडरेशन ने जानबूझकर अपना रुख बदला डिफेंसिव रूप से मजबूत टीमों के बजाय ऐसे टेक्निकली कुशल खिलाड़ियों पर ध्यान दिया जो विरोधियों की डिफेंस को "फ्योर्ड्स (fjords) के बीच से गुजरती लंबी नावों" की तरह चीरकर आगे बढ़ सकें। वे कहते हैं, "नॉर्वे में जमीनी स्तर पर बहुत ध्यान दिया जाता है। इसी वजह से युवा खिलाड़ी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले अपने करियर की शुरुआत में ही नेशनल टीम के लिए खेलने लगे हैं।'
नॉर्वे की कड़ाके की ठंड की वजह से एक और जरूरी निवेश करना पड़ा। 2016 और 2025 के बीच 539 नई आर्टिफिशियल पिचें बनाई गईं और 586 पिचों को रिनोवेट किया गया, ताकि मौसम यह तय न करे कि कौन आगे बढ़ेगा। रविवार को क्वार्टर फाइनल में नॉर्वे का मुकाबला इंग्लैंड से होगा। इंग्लैंड की टीम का भी इतिहास कुछ ऐसा ही रहा है, वे जीत के बहुत करीब तो पहुंचे, लेकिन जीत नहीं पाए। यह वही देश है जिसने इस खेल को जन्म दिया, लेकिन दशकों से इसे जीत नहीं पाया है। पेडरसन परेशान नहीं दिखते। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, 'इंग्लैंड पर ज्यादा दबाव होगा। फुटबॉल का जन्म वहीं हुआ था। नॉर्वे? कोई दबाव नहीं।'
एक ऐसी टीम, जो जीत के बहुत करीब पहुंचकर भी हारती रही है, वह यह बात किसी और से बेहतर जानती है कि दबाव का उस टीम पर क्या असर होता है जो उसे संभालना नहीं जानती। आखिरकार, नॉर्वे ने यह सीख लिया है।
फीफा विश्व कप 2026 में नॉर्वे
- नॉर्वे 28 साल के लंबे अंतराल के बाद वर्ल्ड कप में वापसी कर रहा है। इससे पहले उसने फ्रांस 98 में हिस्सा लिया था।
- नॉर्वे का यह केवल चौथा वर्ल्ड कप है। क्वार्टर-फ़ाइनल में पहुँची आठ टीमों में से किसी का भी रिकॉर्ड इससे कम नहीं है।
- इस एडिशन से पहले नॉर्वे ने सिर्फ दो मैच जीते थे। इस बार वे पहले ही चार मैच जीत चुके हैं।
- नॉर्वे ने अपने पिछले तीन मैचों में सिर्फ सात गोल किए थे। वे अब तक 12 गोल कर चुके हैं।

