भारत के टॉप एथलीट्स के साथ दुर्व्यवहार, ट्रेन से उतारा, घंटों इंतजार और जुर्माने के बाद शर्तों पर छोड़ा

punjabkesari.in Tuesday, Jan 20, 2026 - 01:40 PM (IST)

स्पोर्ट्स डेस्क : हाल ही में कुछ युवा खिलाड़ियों को ट्रेन के टॉयलेट के बाहर बैठकर मीलों का सफर तय करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। अब देश के टॉप पोल वॉल्टर देव मीना और कुलदीप यादव को ट्रेन से उतार दिया गया और पनवेल रेलवे स्टेशन पर घंटों तक फंसा रहना पड़ा। लाखों रुपए के महंगे खेल के सामान (पोल) से जुड़ी इस घटना ने सोशल मीडिया पर गुस्सा भड़का दिया है और भारतीय रेल अधिकारियों पर फिस से सवाल खड़े कर दिए हैं। 

बेंगलुरु में ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स चैंपियनशिप से लौटते समय दोनों भोपाल जा रहे थे, तभी एक ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (TTE) ने उनके पोल वॉल्ट पोल पर आपत्ति जताई। हालांकि पोल जरूरी, बहुत खास सामान थे जिनकी लंबाई लगभग 5 मीटर थी और हर एक की कीमत लगभग 2 लाख रुपए थी, लेकिन अधिकारी ने उन्हें "अनाधिकृत सामान" बता दिया। 

पनवेल स्टेशन पर एथलीटों को ट्रेन से उतरने का आदेश दिया गया। स्पष्टीकरण के लिए उनकी अपील, सीनियर अधिकारियों से बात करने के अनुरोध और तुरंत जुर्माना भरने की पेशकश को भी खारिज कर दिया गया। NNIS स्पोर्ट्स द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में नेशनल रिकॉर्ड होल्डर (5.40m) देव मीना ने पूछा, 'हमें यहां चार से पांच घंटे तक इंतजार कराया गया है। अगर हमारे साथ ऐसा हो रहा है, तो मैं अपने जूनियर्स से क्या उम्मीद कर सकता हूं? अगर भारत में एक इंटरनेशनल लेवल के एथलीट के साथ अभी भी ऐसी चीजें हो रही हैं, तो मैं क्या कह सकता हूं?' 

यह गतिरोध घंटों तक चला जिससे एथलीटों की कनेक्टिंग ट्रेन छूट गई। पोल वॉल्टर के लिए यह सामान बहुत जरूरी होता है; बैट या रैकेट की तरह नहीं, पोल एथलीट के वजन और कूद की ऊंचाई के हिसाब से कस्टम-फिटेड होता है। आखिरकार लंबी बातचीत और जुर्माना भरने के बाद उन्हें बाद में दूसरी ट्रेन में चढ़ने की इजाजत दी गई। हालांकि यह इजाजत एक शर्त के साथ मिली। उन्हें बताया गया कि अगर किसी एक भी यात्री ने पोल से जगह घिरने की शिकायत की, तो उनके खिलाफ और कार्रवाई की जाएगी। 

कुलदीप यादव बेंगलुरु मीट में 5.10m की छलांग लगाकर गोल्ड जीता था, ने लगातार होने वाली लॉजिस्टिक्स की परेशानी पर अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि पोल वॉल्टर को फ्लाइट से यात्रा करते समय भी इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, 'फ्लाइट में भी यही समस्या होती है, ट्रेनों में भी यही समस्या होती है। एथलीट कहां जाएगा? हमें यात्रा करने के लिए जगह चाहिए। भले ही इसके लिए हमें पैसे देने पड़ें, हम देंगे, लेकिन हमारा सामान ठीक से ले जाया जाना चाहिए।' 

मीना और यादव के लिए इमोशनल नुकसान उतना ही भारी है जितना कि उनके इक्विपमेंट को होने वाला फाइनेंशियल रिस्क। जब देश नई ऊंचाइयों को छूने का सपना देख रहा है, खेल में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए एक बड़ा बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है, तो इस बदलाव के लिए जरूरी बुनियादी चीजों से समझौता होता दिख रहा है। मीना ने कहा, 'हर कोई हमसे एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई करने की उम्मीद करता है। लेकिन हमने अब गेम खत्म कर दिया है। हम बस यहां बैठे इंतजार कर रहे हैं कि कोई हमारी मदद करे।' 


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Content Writer

Sanjeev

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