मैदान पर चौके-छक्के ही नहीं, ड्रैसिंग रूम में वन लाइनर के लिए फेम्स थे धोनी, पढ़ें नए किस्से

8/16/2020 6:27:01 PM

नयी दिल्ली : महेंद्र सिंह धोनी को कई बार मैदान के अंदर और बाहर की घटनाओं के बारे में पूछा जाता और हालांकि उन्हें शब्दों को घुमाने में महारत हासिल नहीं लेकिन वह अपने ‘हेलीकॉप्टर’ शॉट की तरह हास्यास्पद तरीके के ‘वन लाइनर’ से इनका जवाब देते। टीम में मतभेदों की अटकलों का मजाक उड़ाने से लेकर खेल में तकनीक की ‘वारंटी’ के संबंध में, रणनीति के काम करने या नहीं करने के बारे में जब भी सवाल पूछे गये तो उनका मजाकिया लहजा उनके काफी काम आया।

वर्ष 2007 विश्व कप टी20 की घटना को ही लें, जिसमें किसी ने भी भारत के जीतने की उम्मीद नहीं थी। चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ तनावपूर्ण फाइनल और धोनी ने कम अनुभवी जोगिंदर शर्मा को गेंदबाजी के लिये लगा दिया। उन्होंने दाव खेला और यह कारगर रहा। उन्होंने इसका जवाब दिया- मैंने सोचा कि मुझे गेंद उसे देनी चाहिए जो सचमुच अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अच्छा करना चाहता है।

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भारत को 2011 विश्व कप ट्राफी दिलाने तक वह जोखिम उठाने में माहिर हो चुके थे। उन्होंने फिर फाइनल को चुना और खुद को फार्म में चल रहे युवराज सिंह से आगे पांचवें नंबर पर उतारने का फैसला किया। श्रीलंका के खिलाफ मुश्किल लक्ष्य का पीछा करने से पहले उन्होंने ड्रेसिंग रूम की बात पर मजाक करते हुए कहा, ‘‘भगवान उनकी मदद करता है जो खुद अपनी मदद करते हैं। मैंने कहा कि भगवान हमें बचाने नहीं आ रहा है। उन्होंने छक्के से इस मैच में जीत दिलायी।

कप्तान को सिर्फ रणनीति बनाने की बातों तक सीमित नहीं होना पड़ता है बल्कि सितारों से भरे ड्रेसिंग रूम को संभालना और खिलाड़ी आपस में मिलकर नहीं चल रहे, ऐसी अटकलों से भी निपटना होता है। आस्ट्रेलिया के 2014 के दौर में ऐसी अटकलें चल रही थीं कि विराट कोहली और शिखर धवन में खटपट चल रही थी क्योंकि धवन ने हल्की चोट के कारण बल्लेबाजी करने पर अनिच्छा व्यक्त की थी।

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धोनी ने इस पर कहा, ‘‘सही बताऊं, विराट ने एक चाकू लिया। उसने शिखर को मारा जो इससे बच गया और फिर हमने उसे बल्लेबाजी के लिये भेजा। ये सभी कहानियां हैं। वार्नर बंधुओं या किसी और को इस पर एक अच्छी मूवी बनानी चाहिए। उनके करियर के दौरान इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया में टीम का वाइटवाश होना भी शामिल है। उनसे जब पूछा गया कि इनमें से कम दर्दनाक कौन सा था तो उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में जवाब दिया, ‘‘आप मरते हो तो आप यह नहीं देखते कि कौन सा मरने का बेहतर तरीका है।

इसके अलावा वह उस तकनीक पर भरोसा नहीं करते थे जो फूलप्रूफ नहीं हो और वह कभी डीआरएस के पक्ष में नहीं थे, हालांकि इसे कब इस्तेमाल करना है, उन्हें इसका महारथी माना जाता था। उनका मानना था- अगर मैं एक ‘लाइफ जैकेट’ खरीदता हूं जो वारंटी के साथ नहीं है तो यह थोड़ा परेशानी भरा है। विशेषकर जब आपने इसके लिये काफी ज्यादा पैसा लगाया है। मैं इसके लिये किसी तरह की वारंटी चाहूंगा। जैसे ही ऐसा हो, मैं खुश हो जाऊंगा।


Jasmeet

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