134 KMPH की रफ्तार से करता था गेंदबाजी, अब नीरज चोपड़ा को हराकर जीता कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड
punjabkesari.in Saturday, Aug 01, 2026 - 02:38 PM (IST)
नई दिल्ली : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में श्रीलंका के युवा जैवलिन स्टार रुमेश थारंगा पथिरागे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 89.75 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक जीत लिया। 23 वर्षीय खिलाड़ी ने भारत के नीरज चोपड़ा, पाकिस्तान के अरशद नदीम, ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के केशॉर्न वॉलकॉट जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए बड़ा उलटफेर कर दिया।
एक थ्रो ने दिलाया गोल्ड
ग्लासगो में तेज हवाओं के बीच पथिरागे ने अपने पहले वैध प्रयास में ही 89.75 मीटर का थ्रो किया, जिसे कोई भी खिलाड़ी पार नहीं कर सका। भारत के नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के साथ रजत पदक जीता, जबकि भारत के यशवीर सिंह ने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर कांस्य पदक अपने नाम किया।
इस सीजन में पहले ही दिखा चुके थे दम
रुमेश पथिरागे इस सीजन शानदार फॉर्म में रहे हैं। उन्होंने रोम डायमंड लीग 2026 में 92.62 मीटर का थ्रो कर न केवल प्रतियोगिता रिकॉर्ड बनाया, बल्कि श्रीलंका का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। वह इस साल 90 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले पहले जैवलिन खिलाड़ी बने थे।
नीरज चोपड़ा ने भी की तारीफ
क्वालिफिकेशन राउंड के बाद नीरज चोपड़ा ने पथिरागे की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि वह एक बेहतरीन खिलाड़ी और अच्छे इंसान हैं। नीरज ने कहा कि पथिरागे ने इस साल शानदार प्रदर्शन किया है और श्रीलंका के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
क्रिकेटर से जैवलिन स्टार बनने तक का सफर
रुमेश पथिरागे का पहला प्यार क्रिकेट था। किशोरावस्था में वह मीडियम पेस गेंदबाज थे और अंडर-18 क्रिकेट में 134 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते थे। स्थानीय क्रिकेट में उनकी रफ्तार सिर्फ ईशान मलिंगा से कम मानी जाती थी। बाद में कोच टोनी प्रसन्ना ने उनकी प्रतिभा पहचानकर उन्हें जैवलिन थ्रो अपनाने की सलाह दी।
कोच ने बदली जिंदगी
पथिरागे ने बताया कि उनके कोच टोनी प्रसन्ना ने सिर्फ जैवलिन की तकनीक ही नहीं सिखाई, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण सबक भी दिए। उन्होंने कहा कि कोच हमेशा बुनियादी तकनीक पर काम करने की सलाह देते हैं और उसी का नतीजा आज दुनिया देख रही है।
लगातार शानदार प्रदर्शन से बने विश्वस्तरीय खिलाड़ी
2025 सीजन में पथिरागे ने 13 बार 82 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंका था। इसी निरंतरता के दम पर उन्होंने विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सातवां स्थान हासिल किया। अब कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण जीतकर उन्होंने खुद को दुनिया के शीर्ष जैवलिन थ्रोअर में शामिल कर लिया है।

