''कौन सही है'', फर्नांडो के साथ हुई झड़प पर जायसवाल-भोगले की बातचीत पर बोले चोपड़ा

punjabkesari.in Tuesday, Aug 25, 2026 - 01:03 PM (IST)

नई दिल्ली : पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भारत और श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्ट के पहले दिन यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो के बीच मैदान पर हुई घटना पर अपनी राय रखी। उन्होंने हर्षा भोगले की पुरानी सोच का सम्मान किया कि जायसवाल को वहां से हट जाना चाहिए था, साथ ही यह सवाल भी उठाया कि क्या बार-बार उकसाए जाने पर प्रतिक्रिया देने के लिए भारतीय बल्लेबाज को दोषी ठहराया जा सकता है। 

चोपड़ा ने कहा कि जायसवाल को मौजूदा टेस्ट सीरीज में छींटाकशी और 'सेंड-ऑफ' (आउट होने पर की जाने वाली टिप्पणी) का सामना करना पड़ा है जिनमें से कुछ हद पार कर जाते हैं, और उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों ही नजरिए में दम है। यह घटना भारत की पारी के 17वें ओवर में हुई जब फर्नांडो ने जायसवाल को आउट किया। भारतीय बल्लेबाज श्रीलंकाई तेज गेंदबाज के पास गए और दोनों के बीच तीखी बातचीत हुई, जिसके बाद फर्नांडो ने अपना सिर जायसवाल की ओर बढ़ाया। इसके बाद जायसवाल आगे झुके जिससे दोनों के सिर आपस में टकरा गए। इसके बाद धक्का मुक्की भी हुई जिसके बाद खिलाड़ी बीच में आए और मामला शांत हुआ। 

चोपड़ा की यह टिप्पणी तब आई जब जायसवाल ने क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले के एक क्रिकबज वीडियो (जिसका शीर्षक था 'क्या जायसवाल ने हद पार की?) पर प्रतिक्रिया दी और लोगों से आग्रह किया कि वे दोनों खिलाड़ियों के बीच हुई बातचीत को जाने बिना इस घटना पर कोई राय न बनाएं। आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, 'हर्षा भोगले क्रिकेट की पुरानी सोच वाले व्यक्ति हैं। उन्हें लगा कि यशस्वी जायसवाल असिथा फर्नांडो के बहुत करीब चले गए और ऐसे गरमा-गरमी वाले पल में, सही काम यही होता है कि बस वहां से हट जाएं। लेकिन जायसवाल ने प्रतिक्रिया देना चुना। अब मैं सोच रहा हूं: कौन सही है? क्या दोनों सही हो सकते हैं?' उन्होंने आगे कहा, 'जायसवाल को लगातार छींटाकशी और 'सेंड-ऑफ' का सामना करना पड़ता है, और कभी-कभी यह हद पार कर जाता है और बहुत निचले स्तर पर चला जाता है। हालांकि, जायसवाल ऐसे खिलाड़ी हैं जो इसका जवाब देना और चुनौती स्वीकार करना पसंद करते हैं।' 

चोपड़ा ने युवा खिलाड़ियों के टकराव से निपटने के तरीके में पीढ़ीगत बदलाव पर भी प्रकाश डाला और कहा कि जायसवाल जैसे खिलाड़ी किसी मुद्दे को शांत होने देने के बजाय तुरंत जवाब देना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, 'यह चीजों को करने का एक नया तरीका है। वरना, मैं तो यही कहता कि यशस्वी को भी जाने दो, उसे छोड़ दो और कुछ दिनों में मामला खत्म हो जाता। लेकिन हमारे युवा, यह नई पीढ़ी, कहती है, 'मैं इंतजार क्यों करूँ? अगर आपने मेरे बारे में कुछ कहा है, तो मैं अभी, आज ही साबित करूंगा कि वह सही है या गलत। मैं आपको दिखाऊंगा। असल में दुनिया और कंटेंट को देखने का यही नया तरीका है।' 

चोपड़ा ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों खिलाड़ियों का अपनी राय रखना सही था और इस मजाक-मस्ती पर दोनों का नज़रिया वाजिब था। पूर्व क्रिकेटर ने कहा, 'दोनों खिलाड़ियों ने इस मजाक-मस्ती में अपनी राय रखी है। दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं।' गौर हो कि जायसवाल और फर्नांडो, दोनों पर उनकी मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया और उन्हें एक डिमेरिट पॉइंट दिया गया। घटना से पहले के 24 महीनों में किसी भी खिलाड़ी ने कोई पिछली गलती नहीं की थी। 
 


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Content Writer

Sanjeev