अय्यर की कप्तानी से लेकर सूर्यवंशी की बल्लेबाजी तक, जिम्बाब्वे सीरीज में इन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर

punjabkesari.in Wednesday, Jul 22, 2026 - 01:13 PM (IST)

स्पोर्ट्स डेस्क : आयरलैंड और इंग्लैंड में लगातार दो सीरीज हारने के बाद जिम्बाब्वे का छोटा दौरा श्रेयस अय्यर के लिए T20I कप्तान के तौर पर खुद को साबित करने का मौका है। वहीं संजू सैमसन के ना होने से टॉप आर्डर में वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी पर भी नजर रहेगी जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू पर खास कमाल नहीं दिखा पाए। यह सीरीज भारत के नए और चार तेज गेंदबाजों वाले अटैक की झलक भी दिखाएगी। भारत जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन T20I मैच खेलेगा जो 23, 25 और 26 जुलाई को खेले जाएंगे।

सूर्यवंशी के पास मौका

वैभव सूर्यवंशी उसी जगह वापस आ गए हैं जहां उन्होंने जनवरी में अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई थी। सूर्यवंशी को लगातार तीन मैच खेलने का मौका मिल सकता है जिससे वे T20I टीम में अपनी जगह पक्की करने का दावा पेश कर सकें। इंग्लैंड में खेले गए उनके शुरुआती तीन मैचों में उन्होंने 14, 13 और 15 रन बनाए थे। उनमें से दो पारियों में जोफ्रा आर्चर की शॉर्ट-बॉल वाली रणनीति ने उन्हें काफी परेशान किया था, रिचर्ड नगारवा और खासकर ब्लेसिंग मुजराबानी भी इसी रणनीति का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

अय्यर की कप्तानी

आयरलैंड (2-0) और इंग्लैंड (4-0) में सीरीज हारने के बाद अय्यर पर सबकी नजरें हैं। उन्होंने IPL 2026 के बाद कप्तानी संभाली थी जबकि दिसंबर 2023 के बाद से उन्होंने कोई T20I मैच नहीं खेला था। अय्यर कप्तान के तौर पर खेले गए 13 मैचों में से सिर्फ एक ही जीत पाए हैं। इस दौरान उन्हें लगातार छह हार का सामना करना पड़ा। इसी खराब दौर की वजह से पंजाब किंग्स का अभियान पटरी से उतर गया था जबकि उन्होंने सीजन की शुरुआत लगातार 7 मैच जीतकर की थी। 

पिछले कुछ सालों में भारत ने जिम्बाब्वे के दौरे के लिए अक्सर दूसरी पंक्ति की (कम अनुभवी) टीमें भेजी हैं। इस बार अनुभवी बल्लेबाजों का ग्रुप भेजना अय्यर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, क्योंकि वे अपनी कप्तानी में पहली जीत की तलाश में हैं। भले ही टीम को जीत नहीं मिल पा रही है, लेकिन अय्यर का अपना फॉर्म बहुत खराब नहीं रहा है। इंग्लैंड सीरीज में वे भारत के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे जहां उन्होंने 5 पारियों में 157.97 के स्ट्राइक रेट से 218 रन बनाए थे। 

रिंकू की वापसी की उम्मीदें 

टी20 वर्ल्ड कप के बाद से रिंकू सिंह टीम से बाहर थे। उस दौरान उनके पिता के निधन से उन्हें निजी नुकसान भी हुआ था। इसके बाद IPL 2026 में उन्होंने अपनी शुरुआती 5 पारियों में से तीन में 4, 1 और 6 रन बनाए। इस दौरान उन्हें 6 से 15 ओवर के बीच अलग-अलग समय पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया। स्पिन गेंदबाजों ने उन्हें बांधे रखा और अगर वे आखिरी पांच ओवरों में बल्लेबाजी नहीं करते थे, तो टीम के लिए कोई खास योगदान नहीं दे पाते थे। 

फिर हालात बदले, KKR के हेड कोच अभिषेक नायर ने रिंकू के 'ट्रिगर मूवमेंट' (शॉट खेलने से पहले की हलचल) में एक तकनीकी बदलाव की ओर इशारा किया, जिसने उनकी किस्मत बदल दी। उन्हें लगा कि पहले रिंकू लेग-साइड पर आसानी से शॉट नहीं खेल पाते थे, लेकिन स्टंप्स के सामने की तरफ कदम बढ़ाने वाले ट्रिगर मूवमेंट से उन्हें अलग-अलग दिशाओं में रन बनाने में मदद मिली। खराब शुरुआत से उबरते हुए रिंकू ने अपनी अगली चार पारियों में बिना आउट हुए 207 रन बनाए। इस दौरान रिंकू का 'फिनिशर' वाला रूप सामने आया और KKR ने लड़खड़ाती शुरुआत के बावजूद प्लेऑफ में जगह बनाने की पुरजोर कोशिश की। अब जब भारत ने डेथ-ओवर्स में अपनी बल्लेबाजी को मजबूत करने के लिए रिंकू पर फिर से भरोसा जताया है, तो रिंकू के लिए एक बार फिर शानदार फिनिशिंग टच देने का मौका तैयार है। 

मयंक, अशोक और तेज गेंदबाजी अटैक 

मयंक यादव ने अपना आखिरी T20I मैच सितंबर 2024 में खेला था। तब से वे पीठ के स्ट्रेस फ्रैक्चर समेत कई चोटों से गुजरे। चोटों की वजह से वह IPL 2025 में नहीं खेल पाए थे और इस सीजन में चार मैचों में वापसी की, जिसमें वे एक भी विकेट नहीं ले पाए और प्रति ओवर 11.37 रन दिए। वे श्रीलंका दौरे पर गई इंडिया ए टीम का भी हिस्सा नहीं थे, इसलिए अगर उन्हें मौका मिलता है, तो प्रदर्शन के लिहाज से मयंक को खुद को साबित करने के लिए काफी कुछ करना होगा। 

अशोक शर्मा और यश ठाकुर, जो दोनों ही अभी तक इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेले हैं हालांकि वह विजयी इंडिया A टीम का हिस्सा थे। मयंक की तरह अशोक ने भी IPL 2026 में लगातार 150 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से गेंदबाजी की। उन्होंने इस सीजन की सबसे तेज गेंद भी फेंकी, जिसकी रफ्तार 154.7 किमी/घंटा मापी गई। अशोक ने गुजरात टाइटंस के लिए कुछ मैच खेले, लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। 

ठाकुर ने पंजाब किंग्स के लिए सिर्फ एक मैच खेला, लेकिन उन्हें समय के साथ तैयार किया गया है। वह लगातार BCCI के खास खिलाड़ियों के ग्रुप का हिस्सा रहे हैं और विजय हजारे ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। उनके सबसे ज्यादा 19 विकेटों की मदद से विदर्भ ने अपना पहला 50-ओवर का खिताब जीता था। 


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Content Writer

Sanjeev

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