CWG 2026: दिलीप गावित ने जीता गोल्ड, मोहम्मद बासिल ने सिल्वर; भारतीय पैरा एथलीटों ने रचा इतिहास

punjabkesari.in Thursday, Jul 30, 2026 - 09:38 AM (IST)

ग्लासगो: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीटों ने इतिहास रच दिया। पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा के फाइनल में दिलीप महादू गावित ने स्वर्ण और मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकाथ ने रजत पदक जीतकर भारत को ऐतिहासिक 1-2 फिनिश दिलाई। यह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा एथलेटिक्स में भारत का दूसरा पोडियम डबल है और देश के लिए गर्व का एक और बड़ा पल साबित हुआ।

दिलीप गावित ने तोड़ा गेम्स रिकॉर्ड

दिलीप गावित ने शानदार दौड़ लगाते हुए 10.71 सेकेंड का समय निकाला, जो उनका सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होने के साथ-साथ नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बन गया। वहीं, मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकेंड के सीजन बेस्ट समय के साथ दूसरा स्थान हासिल कर रजत पदक अपने नाम किया। इंग्लैंड के केविन सैंटोस ने 10.85 सेकेंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता।

400 मीटर छोड़ 100 मीटर में बने चैंपियन

दिलीप गावित का मुख्य इवेंट 400 मीटर है, लेकिन इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में यह स्पर्धा शामिल नहीं थी। ऐसे में उन्होंने 100 मीटर में उतरने का फैसला किया और उसी में इतिहास रचते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके साथ ही वह ग्लासगो खेलों में भारत के तीसरे स्वर्ण पदक विजेता भी बने। इससे पहले मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किग्रा भारोत्तोलन में और शर्मिला ढांकर ने महिलाओं की शॉटपुट F57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।

गुरु पूर्णिमा पर कोच को समर्पित किया गोल्ड

महाराष्ट्र के नासिक जिले के छोटे से गांव तोरण डोंगरी से आने वाले दिलीप गावित ने अपना स्वर्ण पदक गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने कोच वैजनाथ काले को समर्पित किया। उन्होंने बताया कि कभी वह गांव में खेती का काम करते थे, लेकिन उनके कोच ने उनकी प्रतिभा पहचानकर उन्हें प्रशिक्षण के लिए नासिक बुलाया और हर कदम पर उनका साथ दिया।

दिलीप ने कहा, 'मैं एक छोटे से गांव से आता हूं। पहले खेती करता था। मेरे कोच ने मुझे दौड़ते देखा और नासिक आकर ट्रेनिंग करने को कहा। उन्होंने मेरे रहने और प्रशिक्षण का पूरा खर्च उठाया। आज गुरु पूर्णिमा है, इसलिए यह गोल्ड मेडल मैं अपने गुरु को समर्पित करता हूं।'

कोच ने बताया क्यों बदला इवेंट

कोच वैजनाथ काले ने खुलासा किया कि दिलीप का मुख्य इवेंट 400 मीटर है, लेकिन इस संस्करण के कॉमनवेल्थ गेम्स में वह स्पर्धा नहीं थी। इसी कारण उन्होंने 100 मीटर में हिस्सा लिया और पहली ही कोशिश में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

बासिल ने परिवार को समर्पित किया पहला अंतरराष्ट्रीय पदक

केरल के मलप्पुरम जिले के वेलियानकोड के रहने वाले मोहम्मद बासिल के लिए यह पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है। उन्होंने यह उपलब्धि अपने परिवार और कोच को समर्पित की। बासिल ने कहा, 'यह मेरा पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है और मैं बेहद खुश हूं। मेरे परिवार में माता-पिता और दो भाई हैं। दोनों भाई भी दिव्यांग हैं और पूरे परिवार ने बहुत संघर्ष किया है। यह पदक मैं अपने परिवार और कोच को समर्पित करता हूं।'

पदक तालिका में भारत की स्थिति

इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भारत के खाते में 3 स्वर्ण, 9 रजत और 3 कांस्य सहित कुल 15 पदक हो गए हैं। भारत पदक तालिका में आठवें स्थान पर बना हुआ है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 47 स्वर्ण, 21 रजत और 35 कांस्य सहित कुल 103 पदकों के साथ शीर्ष पर कायम है।

क्या है T47 कैटेगरी?

T47 वर्ग उन पैरा एथलीटों के लिए होता है जिनके शरीर के किसी एक हाथ या ऊपरी अंग की अनुपस्थिति या उसकी कार्यक्षमता में मध्यम स्तर तक कमी होती है। इस श्रेणी के खिलाड़ी ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में हिस्सा लेते हैं।


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Content Editor

Ishtpreet Singh

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