37 की उम्र में कप्तानी में वापसी, इशांत शर्मा ने लिस्ट A क्रिकेट में हासिल की बड़ी उपलब्धि

punjabkesari.in Tuesday, Jan 13, 2026 - 02:24 PM (IST)

स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट के सबसे अनुभवी तेज गेंदबाजों में शुमार इशांत शर्मा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अनुभव उम्र से बड़ा होता है। 37 साल की उम्र में इशांत न सिर्फ कप्तानी में लौटे, बल्कि उन्होंने लिस्ट A क्रिकेट में 200 विकेट का ऐतिहासिक आंकड़ा भी छू लिया। विजय हजारे ट्रॉफी के क्वार्टर-फाइनल में दिल्ली की अगुवाई करते हुए इशांत ने मैदान पर नेतृत्व और अनुशासन का बेहतरीन उदाहरण पेश किया, जिसने उनके लंबे करियर में एक और यादगार अध्याय जोड़ दिया।

सात साल बाद फिर कप्तान बने इशांत

मंगलवार, 13 जनवरी को बेंगलुरु के BCCI सेंटर फॉर एक्सीलेंस ग्राउंड-2 में खेले गए विजय हजारे ट्रॉफी क्वार्टर-फाइनल में इशांत शर्मा ने दिल्ली की कप्तानी की। यह मौका खास था क्योंकि करीब सात साल बाद वह किसी मुकाबले में कप्तान की भूमिका में नजर आए। इससे पहले उन्हें आखिरी बार 2019 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान दिल्ली की कमान सौंपी गई थी।

लिस्ट A में 200 विकेट का ऐतिहासिक पड़ाव

इस मुकाबले में इशांत को लिस्ट A क्रिकेट में 200 विकेट पूरे करने के लिए सिर्फ एक सफलता की जरूरत थी। उन्होंने यह उपलब्धि विदर्भ के सलामी बल्लेबाज़ अथर्व तायडे को आउट करके हासिल की। 25वें ओवर में पुरानी गेंद से की गई यह गेंदबाज़ी पूरी तरह अनुभव का नमूना थी। तायडे 72 गेंदों में 62 रन बनाकर अच्छी लय में थे और ध्रुव शौरी के साथ 90 रन की साझेदारी कर चुके थे।

अनुभव ने बदला मैच का रुख

इशांत की यह विकेट सिर्फ आंकड़ों के लिहाज़ से नहीं, बल्कि मैच की दिशा के लिहाज़ से भी अहम रही। अनुशासित लाइन-लेंथ और सीम मूवमेंट का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने विदर्भ की पारी पर ब्रेक लगाया। यह दिखाता है कि भले ही उनकी रफ्तार पहले जैसी न हो, लेकिन उनकी समझ और कंट्रोल आज भी शीर्ष स्तर का है।

वनडे और टेस्ट करियर की झलक

इशांत शर्मा के 200 लिस्ट A विकेटों में से 115 विकेट अंतरराष्ट्रीय वनडे मैचों में आए हैं। उन्होंने 2007 में भारत के लिए वनडे डेब्यू किया था और लंबे समय तक टीम का अहम हिस्सा रहे। हालांकि 2016 के बाद उन्होंने इस फॉर्मेट में भारत के लिए नहीं खेला। करियर के दूसरे चरण में इशांत ने खुद को रेड-बॉल स्पेशलिस्ट के रूप में स्थापित किया और 115 टेस्ट मैचों में 311 विकेट झटके।

टेस्ट टीम से बाहर, लेकिन जज़्बा कायम

2021 के बाद से टेस्ट टीम में वापसी न होने के बावजूद इशांत शर्मा ने घरेलू क्रिकेट में हार नहीं मानी। वह लगातार दिल्ली के लिए खेलते आ रहे हैं और टीम के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज़ों में शामिल हैं। घरेलू सर्किट में उनकी मौजूदगी युवा खिलाड़ियों के लिए मार्गदर्शक की तरह रही है।

इस सीज़न में भी प्रभावशाली प्रदर्शन

मौजूदा विजय हजारे ट्रॉफी सीज़न में इशांत ने सात मैचों में आठ विकेट लिए हैं। खास बात यह रही कि उनकी इकॉनमी रेट सिर्फ 3.69 रही, जो यह दर्शाती है कि वह रन रोकने में कितने प्रभावी रहे हैं। नॉकआउट मुकाबलों में उनका अनुभव दिल्ली के लिए बेहद अहम साबित हुआ है।


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Content Writer

Sanjeev

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