एक समय बुमराह के साथ खेलते थे, अब टी20 विश्व कप में कर रहे अमेरिका की अगुआई

punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 04:26 PM (IST)

नई दिल्ली : जब अमेरिका के कप्तान मोनांक पटेल डेढ़ दशक पहले गुजरात के एक शानदार अंडर-19 क्रिकेटर के तौर पर मशहूर वानखेड़े स्टेडियम के मैदान पर उतरे तो उनके साथ एक और तेजतर्रार तेज गेंदबाज था जिसका एक्शन बड़ा ही अनोखा था- जसप्रीत बुमराह। उस समय मोनांक को शायद ही पता था कि बुमराह आगे चलकर सभी प्रारूप में भारत के सबसे महान गेंदबाज बनेंगे। 

जूनियर क्रिकेट के पुराने अच्छे दिनों को याद करते हुए मोनांक को वे दिन याद आए जब वह भारत के लिए नीली जर्सी पहनने का सपना देखते थे। भारत में अगले महीने होने वाले टी20 विश्व कप में खेलने की तैयारी कर रहे मोनांक ने पीटीआई को बताया, ''हां, अक्षर (पटेल) और जसप्रीत (बुमराह) के साथ खेलने की मेरी बहुत अच्छी यादें हैं। मैंने गुजरात अंडर-19 का अपना पहला साल जसप्रीत के साथ खेला था और उससे पहले मैं अक्षर के साथ अंडर-16 खेला था। हम (बुमराह और वह) दो साल, दो सत्र तक साथ रहे। गुजरात टीम के लिए बहुत सारे मैच खेले।'

उन्हें याद है कि बुमराह तब भी बाकियों से बेहतर थे। मोनांक ने याद करते हुए कहा, 'हमने लाल और सफेद गेंद, दोनों तरह का क्रिकेट खेला और वह सच में बहुत खास समय था। यह मेरे क्रिकेट के सफर का शुरुआती दौर था और तब भी जिस तरह से हम खेल रहे थे, विशेषकर जिस तरह से जसप्रीत प्रदर्शन कर रहा था, हम जानते थे कि उसमें वह एक्स फैक्टर है और वह निश्चित रूप से कुछ बड़ा करेगा।' 

मोनांक के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का रास्ता आसान नहीं था। उन्होंने 2013 में जब हमेशा के लिए अमेरिका जाने का फैसला किया तो उन्होंने क्रिकेट छोड़ने के बारे में सोचा था जबकि उन्हें 2010 में ही ग्रीन कार्ड मिल गया था। उन्होंने कहा, 'मेरे पास 2010 से ग्रीन कार्ड था और मैंने 2013 के बाद फैसला किया कि मैं अमेरिका जाना चाहता हूं। मेरा परिवार पहले से ही वहां बसने की योजना बना रहा था।' 

मोनांक ने कहा, 'मैंने वहां एक-दो महीने रहने की कोशिश की और फिर भारत वापस आ गया और रणजी ट्रॉफी में गुजरात के लिए खेलने की आखिरी कोशिश करने के बाद। जब मुझे वह मौका नहीं मिला तो मैंने अमेरिका वापस जाने और हमेशा के लिए वहीं बसने का फैसला किया।' मोनांक ने रेस्टोरेंट व्यवसाय की तरफ रुख किया लेकिन क्रिकेट से हमेशा उनका जुड़ाव रहा। उन्होंने कहा, 'जब मैं अमेरिका गया तो मेरा विजन और लक्ष्य सिर्फ क्रिकेट खेलना नहीं था। मैं अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहता था।' 

क्रिकेट अमेरिका में शीर्ष 10 खेल में भी नहीं है और मोनांक के लिए इससे पेशेवर तौर पर पूरी तरह से जुड़ना आसान फैसला नहीं था। उन्होंने कहा, '2018 में यह आसान नहीं था। हमारे लिए सिर्फ क्रिकेट खेलकर वित्तीय रूप से आगे बढ़नाा आसान नहीं था। इसलिए जब हम 2018 या 2019 में खेलते थे तो पूरे साल हमारा कार्यक्रम व्यस्त नहीं होता था।' मोनांक ने कहा, 'लेकिन बाद में जैसे ही हमने अच्छा करना शुरू किया और हमें 2020 में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय टीम का दर्जा मिला तो वित्तीय स्थिति और मौकों के हिसाब से भी सब कुछ बेहतर होता गया। इसलिए एक खिलाड़ी के तौर पर शुरुआती दो-तीन साल थोड़े मुश्किल थे लेकिन हम इससे बहुत अच्छे तरीके से निपटे।' 

भारत और पाकिस्तान की टीम दोनों देशों के बीच कड़वाहट भरे रिश्तों के कारण क्रिकेट के मैदान पर हाथ नहीं मिलातीं लेकिन जब मोनांक पाकिस्तानी मूल के अली खान और शायन जहांगीर के साथ मैदान पर उतरते हैं तो उनका लक्ष्य सिर्फ अपने देश का प्रतिनिधित्व करना होता है। मोनांक ने कहा, 'जब आप अमेरिका का प्रतिनिधित्व करते हैं तो कोई भारतीय, कोई पाकिस्तानी नहीं होता। हर कोई देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है और हम लंबे समय से खेल रहे हैं और हम बहुत करीबी दोस्त हैं।' 

उन्होंने कहा, 'वे (अली और जहांगीर) टीम के हमारे साथी हैं। जब क्रिकेट की बात आती है तो कोई भारतीय, कोई पाकिस्तानी नहीं होता।' मोनांक के लिए वानखेड़े स्टेडियम की पिच जानी-पहचानी है क्योंकि अमेरिकी टीम में उनके और सौरभ नेत्रवलकर समेत कई भारतीय मूल के खिलाड़ियों ने इस मैदान पर कई मैच खेले हैं। पिछले टूर्नामेंट में पाकिस्तान के खिलाफ जीत में अर्धशतक लगाने वाले कप्तान मोनांक ने कहा, 'बहुत सारे खिलाड़ी यहां पहले भी खेल चुके हैं और मुझे लगता है कि हम इसे एक चुनौती के तौर पर लेंगे, और जब हमें चुनौती मिलती है तो मुझे लगता है कि यह टीम हमेशा अच्छा प्रदर्शन करती है।' 


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Content Writer

Sanjeev

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