टीम इंडिया के ‘सुपीरियर बैट’ बयान पर भानुका राजपक्षे ने दी सफाई

punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 01:09 PM (IST)

स्पोर्ट्स डेस्क : टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान श्रीलंका के बल्लेबाज भानुका राजपक्षे अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए थे। उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों के “सुपीरियर” या ज्यादा ताकत पैदा करने वाले बैट इस्तेमाल करने की बात कही थी। हालांकि अब राजपक्षे ने सफाई देते हुए कहा है कि उनके बयान को गलत समझा गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी तरह का आरोप लगाना नहीं था, बल्कि भारत की उन्नत क्रिकेट व्यवस्था और बैट निर्माण मानकों की तारीफ करना था।

क्या था पूरा मामला?

राजपक्षे के शुरुआती इंटरव्यू में यह संकेत मिला था कि भारतीय खिलाड़ियों के पास ऐसे बैट हैं जो अतिरिक्त पावर देते हैं और अन्य टीमों को उपलब्ध नहीं हैं। यह टिप्पणी सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे।

बाद में राजपक्षे ने सोशल मीडिया पर लिखा: 'मेरा इरादा भारत की क्रिकेट व्यवस्था की तारीफ करना था। भारत का सिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकरण मानक बेहद उन्नत हैं। मेरे बयान के कुछ हिस्से अनुवाद में गलत समझे गए।'

इस स्पष्टीकरण के बाद बैट से छेड़छाड़ जैसी अटकलों पर विराम लग गया।

ICC नियम क्या कहते हैं?

आईसीसी के नियमों के अनुसार: बैट पूरी तरह लकड़ी का बना होना चाहिए। अंपायर नियमित जांच करते हैं। किसी भी प्रकार का कृत्रिम लेयर या संरचनात्मक बदलाव प्रतिबंधित है। भारत के खिलाफ कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। ICC या भारतीय टीम की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे साफ है कि नियामक संस्था को फिलहाल कोई समस्या नजर नहीं आती।

‘सुपीरियर बैट’ की हकीकत क्या है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी कस्टमाइज्ड बैट का उपयोग करते हैं। इन बैट्स में शामिल होते हैं: पसंदीदा वेट डिस्ट्रीब्यूशन, बेहतर पिक-अप, खास स्पाइन मोटाई, पावर हिटिंग के लिए एज प्रोफाइल।

आधुनिक व्हाइट-बॉल क्रिकेट में ‘डकबिल प्रोफाइल’ काफी लोकप्रिय है, जिससे बैट का वजन नीचे की ओर रहता है और बैट स्पीड बढ़ती है। यह सुविधा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाड़ी भी इसी तरह के कस्टम बैट इस्तेमाल करते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि IPL जैसे बड़े प्लेटफॉर्म और मजबूत आर्थिक ढांचे के कारण भारत का क्रिकेट इकोसिस्टम तकनीकी रूप से काफी आगे है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब टीम इंडिया पर बड़े टूर्नामेंट में इस तरह के आरोप लगे हों। 2023 वनडे वर्ल्ड कप के दौरान पाकिस्तान के पूर्व कप्तान हसन रजा ने दावा किया था कि भारतीय गेंदबाजों को अलग गेंदें दी जा रही हैं। उस बयान की भी क्रिकेट दिग्गजों ने कड़ी आलोचना की थी।

अक्सर जब कोई टीम लगातार अच्छा प्रदर्शन करती है, तो तकनीकी या सामरिक बढ़त की चर्चा शुरू हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सफलता का कारण मजबूत ढांचा और तैयारी है, न कि किसी नियम का उल्लंघन।


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Content Editor

Ishtpreet Singh

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