''डार्क बॉय के लिए चॉकलेट केक'', पूर्व भारतीय खिलाड़ी ने साथी खिलाड़ी पर लगाया रंगभेद का आरोप
punjabkesari.in Wednesday, Mar 25, 2026 - 01:19 PM (IST)
स्पोर्ट्स डेस्क : भारत के पूर्व स्पिनर Laxman Sivaramakrishnan ने अपने क्रिकेट करियर के दौरान झेले नस्लभेद के कई मामलों का खुलासा किया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि 14 साल की उम्र से ही उन्हें रंगभेद का सामना करना पड़ा, जिसने उनके मानसिक जीवन पर गहरा असर डाला और उनके करियर को भी प्रभावित किया।
सीनियर खिलाड़ी ने जूते साफ करने को कहा
सिवारामकृष्णन ने बताया कि जब वह चेपॉक में नेट बॉलर के तौर पर भारतीय टीम के साथ जुड़े थे, तब एक सीनियर भारतीय खिलाड़ी ने उन्हें ग्राउंड स्टाफ समझ लिया और जूते साफ करने के लिए बुलाया। इस घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'मैंने उनकी तरफ देखा और कहा कि यह मेरा काम नहीं है, आप अपना काम खुद कीजिए।' बाद में उन्हें समझ आया कि यह रंगभेद से जुड़ा मामला था।
‘करुपा’ कहकर बुलाते थे खिलाड़ी और दर्शक
उन्होंने बताया कि तमिलनाडु टीम में कुछ खिलाड़ी उन्हें ‘करुपा’ (डार्क स्किन) कहकर बुलाते थे। वहीं मुंबई, चंडीगढ़ और जालंधर में फील्डिंग के दौरान दर्शक भी उनके रंग को लेकर अपमानजनक नारे लगाते थे, जिससे उन्हें काफी ठेस पहुंचती थी।
जन्मदिन पर केक को लेकर की गई टिप्पणी
सिवारामकृष्णन ने एक और घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उनके 17वें जन्मदिन पर एक सीनियर खिलाड़ी ने उनके रंग को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उस समय भारतीय दिग्गज Sunil Gavaskar ने उन्हें संभाला। इस घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'हे सनी, तुमने सही रंग का केक मंगाया है। इतने डार्क लड़के के लिए डार्क चॉकलेट केक,' यह टिप्पणी एक सीनियर खिलाड़ी ने की थी। उन्होंने आगे बताया, 'मैं रोने लगा था और केक काटने से मना कर दिया था। सुनील गावस्कर मेरे पास आए, मुझे समझाया और फिर मैंने आंसुओं के साथ केक काटा।'
मानसिक रूप से पड़ा गहरा असर
सिवारामकृष्णन ने कहा कि इस तरह की घटनाओं ने उनके मन पर गहरा असर डाला। उन्होंने कहा, 'मुझे 14 साल की उम्र से ही रंगभेद का सामना करना पड़ा और इन घटनाओं ने मेरे दिमाग पर गहरा असर डाला।'

