पाकिस्तान के बहिष्कार ड्रामा से बांग्लादेश को होगा बड़ा फायदा, जानिए कैसे
punjabkesari.in Tuesday, Feb 10, 2026 - 04:05 PM (IST)
नई दिल्ली : टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC), बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के बीच पैदा हुआ गतिरोध अंततः एक अप्रत्याशित नतीजे पर खत्म हुआ। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट से हटने के बावजूद बांग्लादेश ने इस संकट को अवसर में बदल दिया और कई दीर्घकालिक प्रशासनिक व आर्थिक लाभ हासिल किए।
जहां पाकिस्तान ने समर्थन में बहिष्कार की धमकी दी, वहीं असली फायदा बांग्लादेश को मिला, जो बातचीत के बाद पहले से अधिक मजबूत स्थिति में उभरकर सामने आया।
संकट की शुरुआत: बांग्लादेश का हटना, स्कॉटलैंड की एंट्री
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश ने भारत में खेलने से इनकार कर दिया और सुरक्षा चिंताओं के चलते अपने मुकाबलों के लिए यात्रा से मना कर दिया। इसके बाद आईसीसी ने बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया।
इस फैसले के बाद पाकिस्तान ने बांग्लादेश के समर्थन में भारत के खिलाफ अपने हाई-प्रोफाइल मैच के बहिष्कार की चेतावनी दी, जिससे अरबों डॉलर की ब्रॉडकास्टिंग कमाई खतरे में पड़ गई और आईसीसी को आपात मध्यस्थता करनी पड़ी।
ICC का नरम रुख और बदली हुई वैश्विक नीति
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक क्रिकेट की एक नई हकीकत उजागर की—अब भू-राजनीतिक तनाव सीधे टूर्नामेंट योजना, राजस्व मॉडल और गवर्नेंस फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। आईसीसी ने इस बार दंडात्मक रुख अपनाने के बजाय व्यावसायिक स्थिरता को प्राथमिकता दी। यह संकेत है कि भविष्य में बड़े और संवेदनशील विवादों को सुलझाने में आईसीसी बातचीत और समझौते का रास्ता ज्यादा अपनाएगा।
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को मिले सबसे बड़े फायदे
1. बहिष्कार के बावजूद कोई जुर्माना नहीं
आमतौर पर आईसीसी टूर्नामेंट से हटने पर भारी जुर्माना, राजस्व कटौती और प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है।
लेकिन इस मामले में आईसीसी ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश पर कोई वित्तीय, खेल संबंधी या प्रशासनिक दंड नहीं लगाया जाएगा। यह बेहद दुर्लभ फैसला माना जा रहा है और यह दर्शाता है कि बांग्लादेश ने कमजोरी नहीं बल्कि मजबूती की स्थिति से बातचीत की।
2. ICC राजस्व हिस्सेदारी पूरी तरह सुरक्षित
आईसीसी से मिलने वाला वार्षिक फंड फुल मेंबर्स के लिए आय का बड़ा स्रोत होता है। नतीजा: बांग्लादेश को हर साल मिलने वाली करीब 26–27 मिलियन डॉलर की आईसीसी राशि पर कोई असर नहीं पड़ा। यदि यह राशि कटती, तो घरेलू क्रिकेट, सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट और जमीनी स्तर के विकास कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हो सकते थे।
3. भविष्य में बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी
आईसीसी ने संकेत दिए हैं कि 2031 वनडे वर्ल्ड कप चक्र से पहले बांग्लादेश को किसी बड़े वैश्विक टूर्नामेंट की मेजबानी सौंपी जा सकती है।
रणनीतिक फायदे:
पर्यटन और ब्रॉडकास्ट राजस्व में बढ़ोतरी
इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास
आईसीसी में मजबूत प्रभाव
घरेलू परिस्थितियों में खेलने का लाभ, मेजबानी अधिकार अक्सर कई वर्षों तक आर्थिक और खेल संबंधी फायदे देते हैं।
4. फुल मेंबर स्टेटस और वोटिंग पावर बरकरार
आईसीसी ने दोहराया कि बांग्लादेश एक महत्वपूर्ण फुल मेंबर बना रहेगा। गवर्नेंस में प्रभाव और वोटिंग अधिकार बनाए रखना किसी एक टूर्नामेंट में खेलने से कहीं अधिक अहम माना जाता है। एक बार प्रभाव घटने के बाद उसे दोबारा हासिल करना बेहद मुश्किल होता है।
5. पाकिस्तान के समर्थन से बढ़ी बांग्लादेश की ताकत
पाकिस्तान की बहिष्कार धमकी ने इस विवाद को द्विपक्षीय मुद्दे से आगे बढ़ाकर वैश्विक संकट में बदल दिया।
इससे आईसीसी पर दबाव बढ़ा और उसने सख्त कार्रवाई की बजाय बातचीत को चुना, जिससे बांग्लादेश की सौदेबाजी की स्थिति और मजबूत हुई। हालांकि, पाकिस्तान को बाद में मैच खेलने पर सहमत होने के बावजूद बांग्लादेश जैसे दीर्घकालिक लाभ नहीं मिले।
निष्कर्ष: संकट से मजबूत बनकर निकला BCB
टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर रहने के बावजूद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा विजेता बनकर उभरा। आर्थिक सुरक्षा, भविष्य की मेजबानी, और संस्थागत ताकत बनाए रखते हुए BCB ने यह दिखा दिया कि सही रणनीति और समय पर बातचीत से संकट को भी अवसर में बदला जा सकता है।

