''शुरुआत में मुझे उनकी बात पर यकीन नहीं हुआ'', T20 WC में रोहित शर्मा के समर्थन को याद कर बोले सैमसन

punjabkesari.in Tuesday, Jul 21, 2026 - 01:56 PM (IST)

नई दिल्ली : भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने बताया है कि शुरुआत में उन्हें रोहित शर्मा की इस बात पर यकीन करने में मुश्किल हुई कि ICC पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 में उनकी भूमिका होगी। ऐसा तब हुआ जब उन्हें टूर्नामेंट के आखिरी दौर में प्लेइंग XI से बाहर कर दिया गया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपना आत्मविश्वास वापस पाया और वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत के अभियान की सबसे यादगार पारियों में से एक खेली। 

न्यूजीलैंड T20I सीरीज के बाद के मुश्किल दौर को याद करते हुए सैमसन ने माना कि वह मानसिक रूप से थक चुके थे और उन्हें वह रास्ता नहीं दिख रहा था जो रोहित उनके लिए देख रहे थे। सैमसन ने जियोस्टार से कहा, 'सच कहूं तो, उस समय मुझे उनकी बात पर यकीन नहीं हुआ। माफ करना। हो सकता है कि उन्होंने दिल से या अपने अनुभव से कहा हो, लेकिन उस दिन मैं वह नहीं देख पा रहा था जो वह देख रहे थे। यह मेरे चेहरे पर साफ दिख रहा था; उस दिन मैं थोड़ा परेशान था।' 

सैमसन ने बताया कि टीम से बाहर होने की निराशा वर्ल्ड कप के शुरुआती दौर तक बनी रही, जिससे उनके लिए तुरंत आगे बढ़ना मुश्किल हो गया। उन्होंने आगे कहा, 'न्यूजीलैंड सीरीज़ के दो दिन बाद ही हमारा वर्ल्ड कप अभियान शुरू हो गया, और मुझे उबरने में कम से कम एक हफ्ता लगा। मुझे बातें मन में दबाकर रखना पसंद नहीं है, इसलिए अगर मैं 100 प्रतिशत ठीक महसूस नहीं कर रहा होता हूं तो यह मेरे चेहरे पर दिख जाता है। पटरी पर लौटने से पहले मैं चार-पांच दिनों तक उस दौर से गुजरा।' 

केरल के इस बल्लेबाज़ ने कहा कि यह झटका आखिरकार आत्म-चिंतन का मौका बन गया, जिससे उन्हें अपनी सोच और खेल खेलने की वजहों पर फिर से विचार करने की प्रेरणा मिली। सैमसन ने कहा, 'आपको पता होता है कि आप नाकाम रहे हैं, तो आगे क्या? आप सबसे निचले स्तर पर होते हैं, इसलिए वहां से आप सिर्फ ऊपर ही जा सकते हैं। मैंने मानसिक रूप से खुद पर काम करना शुरू किया। मैंने खुद से सवाल पूछना शुरू किया कि मैं क्रिकेट क्यों खेलता हूं? मेरा मकसद क्या है? ऐसा लग रहा था जैसे वर्ल्ड कप के दौरान मैं खुद को फिर से खोज रहा हूं। और फिर सब कुछ वापस पटरी पर आ गया।'

इसी नए नजरिए ने वेस्टइंडीज के खिलाफ वर्चुअल क्वार्टर-फाइनल में सैमसन की मैच जिताऊ पारी की नींव रखी। उन्होंने इस पारी को उन खास दिनों में से एक बताया जब सब कुछ सही होता है। उन्होंने कहा, 'जिम्बाब्वे वाले मैच के बाद मैंने उस गेम के लिए बेहतर तैयारी की थी। IPL और भारत के लिए खेलते हुए ऐसे कई दिन आए हैं जब मैंने शतक बनाए हैं और सब कुछ सही लगा है। यह भी उन्हीं दिनों में से एक था। आप बस मजा लेते हैं, पल में जीते हैं, प्रोसेस पर ध्यान देते हैं और चीजें अपने आप होने लगती हैं।' 

हालांकि पावरप्ले के बाद तेजी से रन बनाना उनका स्वाभाविक अंदाज है, लेकिन सैमसन ने कहा कि मैच की स्थिति के हिसाब से अलग तरह से खेलने की जरूरत थी क्योंकि दूसरे छोर पर लगातार विकेट गिर रहे थे। उन्होंने कहा, 'मुझे पता था कि यह भारत के लिए बहुत बड़ा मैच है। पावरप्ले के बाद मैं आमतौर पर तेजी से खेलने लगता हूं। मैं एक ओपनर हूं, अगर मैं पावरप्ले निकाल लेता हूं और हमारी टीम में नंबर 8 तक बल्लेबाज हैं, तो मेरा गेम प्लान बॉलिंग पर हावी होने का होता है। लेकिन उस मैच में जब भी मुझे लगा कि अब अटैक करने का समय है, दूसरे छोर पर विकेट गिर जाता था। तभी मुझे एहसास हुआ कि खेल ही सबसे बड़ा टीचर है। खेल ही आपको बताता है कि क्या करना है।' 

सैमसन ने पारी के बाद किए गए इमोशनल सेलिब्रेशन के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि यह अपनी जीत का जश्न मनाने के बजाय आभार व्यक्त करने का तरीका था। उन्होंने कहा, 'यह बहुत निजी जश्न था, लेकिन यह सबके सामने आ गया। मैं बहुत आस्था रखने वाला इंसान हूं। मैं अपने भगवान में विश्वास करता हूं और मुझे पता है कि यह मैंने नहीं किया।'

विकेटकीपर-बल्लेबाज ने कहा कि पारी के दौरान कुछ पल ऐसे भी आए जिन्होंने उन्हें खुद हैरान कर दिया, जिससे उनका यह विश्वास और मजबूत हुआ कि वह टीम की मदद करने के लिए बस एक जरिया थे। उन्होंने कहा, 'मैंने इतनी पारियां खेली हैं कि मुझे पता होता है कि मैंने कौन से शॉट खेले हैं, लेकिन कुछ शॉट ऐसे भी होते हैं जिन्हें देखकर मैं सोचता हूं, 'मैंने वह शॉट कैसे खेला?' मैं बस बहुत शुक्रगुजार हूं कि यह मेरे जरिए हुआ और मैं टीम की मदद कर पाया। वह पल मेरे साथ मेरी आखिरी सांस तक रहेगा। वह बहुत खास था।' 
 


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Content Writer

Sanjeev

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