विश्व कप हमारे लिए आंखें खोलने वाला रहा, इस टीम पर गर्व है : सिकंदर रजा

punjabkesari.in Sunday, Mar 01, 2026 - 08:14 PM (IST)

नई दिल्ली : जिम्बाब्वे टी20 विश्व कप के सुपर आठ चरण में एक भी मैच जीतने में सफल नहीं रहा लेकिन टीम के कप्तान सिकंदर रजा ने रविवार को यहां कहा कि उन्हें इस टीम के खिलाड़ियों पर गर्व है और इस विश्व कप से मिली सीख टीम के भविष्य को बेहतर करेगी। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांच विकेट की हार के साथ जिम्बाब्वे का विश्व कप में अभियान सुपर आठ चरण में खत्म हुआ। 

टीम ने शुरुआती चरण में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ उलटफेर कर सुपर आठ में जगह बनाई थी लेकिन इस चरण में उसे वेस्टइंडीज, भारत और दक्षिण अफ्रीका से करारी शिकस्त मिलीं। रजा दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में 43 गेंद में 73 रन की ताबड़तोड़ पारी खेलने के बाद तीन विकेट भी लिये। वह टीम की हार के बावजूद इस हरफनमौला प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच चुने गये'। रजा ने मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'मैं खुद के बारे में ज्यादा बात करना पसंद नहीं करता हूं लेकिन मुझे इस टीम पर गर्व है। ज्यादातर लोगों को लगा नहीं था कि हम टूर्नामेंट में इतनी दूर तक आयेंगे। मैं एक बात पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि मुझे अपने इन लड़कों पर बेहद गर्व है।' 

जिम्बाब्वे ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 153 रन बनाये लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने पांच विकेट के नुकसान पर 17.5 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे शहर में दर्शकों से प्यार मिलना इस बात का प्रमाण है कि टीम ने इस विश्व कप से काफी सम्मान हासिल किया है। उन्होंने कहा, 'इस औपचारिकता वाले मुकाबले के लिए इतनी बड़ी संख्या में दर्शक स्टेडियम में मौजूद थे। आज भले ही हम टूर्नामेंट से बाहर हो गए हों, लेकिन जिस तरह दर्शकों ने हमारा समर्थन किया, उसके लिए मेरे मन में गहरा सम्मान है। मेरा और मेरी टीम का लक्ष्य यही था कि हम सम्मान अर्जित करें।' 

कभी शीर्ष 10 टीमों में शुमार रही जिम्बाब्वे को विश्व कप का टिकट पक्का करने के लिए अफ्रीका क्वालीफायर का सहारा लेना पड़ा था लेकिन रजा ने कहा कि बड़ी टीमों से खेलने के बाद अब खिलाड़ियों को मौजूद दौर के क्रिकेट के बारे में ज्यादा पता है। उन्होंने पिछले 18 महीनों में टीम के बदलाव पर कहा, 'सबसे बड़ा बदलाव हमारी संस्कृति में आया है। हम प्रबंधन या संसाधनों को दोष दे सकते थे। हमने स्वीकार किया कि मौजूदा स्थिति के लिए हम ही ज़िम्मेदार हैं। जैसे ही हमने यह माना, हमने खुद को इस मुश्किल से बाहर निकालने का संकल्प लिया। हमने तय किया कि दुनिया से सम्मान भी अर्जित करेंगे। एक बार निर्णय हो गया तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।' 

उन्होंने शीर्ष टीमों में बने रहने की चुनौती पर कहा, 'यह विश्व कप हमारे लिए आंखें खोलने वाला रहा। हमने अपनी कमजोरियों और संयोजनों को समझा। छोटे मैदान, बड़े मैदान, धीमी पिचें, लगातार यात्रा जैसी चीजों ने हमें सिखाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल कितना कठिन है। हार के बावजूद ये सबक मिली हैं। अगली बार ऐसी स्थिति में होंगे तो ज्यादा तैयार रहेंगे।' 

उन्होंने कहा कि टीम भविष्य में विदेशी दौरे पर ज्यादा मैच खेलना चाहेगी। रजा ने कहा, ''दौरे पर जाकर जो सबक मिलते हैं, वे घरेलू मैदान से कहीं ज्यादा मूल्यवान होते हैं। हमें असहज परिस्थितियों में खेलना सीखना होगा। विश्व कप जल्दी आने वाला है, इसलिए इस युवा टीम की प्रगति तेज़ करनी होगी।' 40 साल के हो चुके रजा को उम्मीद है कि वह आगामी विश्व कप में भी टीम का प्रतिनिधित्व करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, 'जहां तक 40 वर्ष की उम्र की बात है, उम्मीद है कि अभी थोड़ा समय बाकी है। एक दिन में एक कदम, एक मैच पर ध्यान दे रहा हूं। देखते हैं शरीर कैसा साथ देता है और मैं अपने देश को और कितना दे सकता हूं।' 


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Content Writer

Sanjeev

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