काबुल के अस्पताल पर पाकिस्तान का हवाई हमला, 400 लोगों की मौत के बाद अफगानी क्रिकेटरों ने लगाई UN से गुहार
punjabkesari.in Tuesday, Mar 17, 2026 - 01:14 PM (IST)
स्पोर्ट्स डेस्क : अफगानिस्तान के क्रिकेट स्टार राशिद खान और मोहम्मद नबी ने काबुल में कथित पाकिस्तानी हवाई हमलों की निंदा की है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल में कथित तौर पर एक अस्पताल को निशाना बनाया गया जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिकों की जान गई। हमले की खबरों के बाद दोनों क्रिकेटरों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए अपना गुस्सा और दुख जाहिर किया।
अफगान अधिकारियों के अनुसार सोमवार देर रात काबुल में एक पाकिस्तानी हवाई हमले ने 'उमर एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल' को निशाना बनाया। अफगानिस्तान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत के अनुसार यह हमला स्थानीय समय के अनुसार रात करीब 9 बजे हुआ जिससे 2,000 बिस्तरों वाले इस अस्पताल को भारी नुकसान पहुंचा। फितरत ने बताया कि इस हमले में मरने वालों की संख्या 400 तक पहुंच गई है जबकि लगभग 250 अन्य लोग घायल हुए हैं।
इस घटना पर 'X' (ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए अफगानिस्तान के T20I कप्तान राशिद खान ने कहा कि आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे पर हमले किसी भी हाल में सही नहीं ठहराए जा सकते। राशिद ने लिखा, 'काबुल में पाकिस्तानी हवाई हमलों के कारण आम नागरिकों के हताहत होने की ताजा खबरों से मैं बहुत दुखी हूं।'
राशिद ने कहा, 'आम नागरिकों के घरों, शिक्षण संस्थानों या मेडिकल सुविधाओं को निशाना बनाना (चाहे जान-बूझकर हो या गलती से) एक युद्ध अपराध है। इंसानी जानों के प्रति यह घोर लापरवाही, खासकर रमजान के पवित्र महीने में बेहद घिनौनी और गहरी चिंता का विषय है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं संयुक्त राष्ट्र (UN) और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली दूसरी एजेंसियों से अपील करता हूं कि वे इस अत्याचार की पूरी तरह से जांच करें और इसके दोषियों को सजा दिलाएं। इस मुश्किल घड़ी में मैं अपने अफगान लोगों के साथ खड़ा हूं। हम इस सदमे से उबरेंगे और एक राष्ट्र के तौर पर हम फिर से उठ खड़े होंगे। हम हमेशा ऐसा ही करते आए हैं। इंशाअल्लाह।'
अफगानिस्तान के अनुभवी ऑलराउंडर मोहम्मद नबी ने भी सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश के जरिए इस हमले पर अपनी प्रतिक्रिया दी और इस घटना में जान गंवाने वाले लोगों के लिए शोक व्यक्त किया। नबी ने लिखा, 'आज रात काबुल के एक अस्पताल में उम्मीद की किरण बुझ गई। इलाज के लिए आए युवा लड़कों को पाकिस्तानी सेना के शासन द्वारा की गई बमबारी में मार डाला गया। मांएं अस्पताल के दरवाज़ों पर खड़ी अपने बेटों के नाम पुकारती रहीं। रमजान की 28वीं रात को, उनकी जिंदगी अचानक खत्म हो गई।'

