पाक में जन्मे क्रिकेटर की गावस्कर को कड़ी प्रतिक्रिया, सनराइजर्स द्वारा अबरार को खरीदने पर की थी टिप्पणी
punjabkesari.in Tuesday, Mar 17, 2026 - 06:00 PM (IST)
स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट के दिग्गज Sunil Gavaskar हाल ही में दिए गए अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। उन्होंने The Hundred 2026 की नीलामी में भारतीय मालिकों वाली टीमों द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साइन करने पर सवाल उठाए थे। उनके इस बयान के बाद पूर्व इंग्लिश क्रिकेटर Azeem Rafiq ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिससे यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया।
अबरार अहमद की डील से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत तब हुई जब Abrar Ahmed को ‘सनराइजर्स लीड्स’ ने £190,000 में साइन किया। यह फ्रेंचाइजी Sun TV Network के स्वामित्व में है, जो Sunrisers Hyderabad की भी मालिक है। गावस्कर ने अपने कॉलम में इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे संवेदनशील मुद्दा बताया।
गावस्कर का बयान और तर्क
गावस्कर ने अपने लेख में कहा कि 2008 के Mumbai attacks के बाद भारतीय फ्रेंचाइजियों ने IPL में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को शामिल करना बंद कर दिया था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि खिलाड़ियों को दी जाने वाली फीस अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की सरकारी प्रणाली में जाती है, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा हो सकती हैं। उनके इस बयान ने क्रिकेट और राजनीति के संबंध पर नई बहस छेड़ दी।
अजीम रफीक की तीखी प्रतिक्रिया
गावस्कर के इस बयान पर Azeem Rafiq ने सोशल मीडिया पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे “बेतुका” और “निंदनीय” बताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। रफीक ने यह भी सवाल उठाया कि क्या गावस्कर ने कभी ऐसे मुद्दों के विरोध में कमेंट्री से दूरी बनाई है।
कोच डेनियल वेटोरी का पक्ष
सनराइजर्स लीड्स के हेड कोच Daniel Vettori ने इस पूरे मामले पर अलग दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि टीम मैनेजमेंट के भीतर पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साइन न करने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी। वेटोरी के अनुसार, टीम ने अपनी जरूरतों के आधार पर खिलाड़ियों का चयन किया और अनुभवी स्पिनर की तलाश में अबरार अहमद को चुना गया।
BCCI का स्पष्ट रुख
इस विवाद के बीच Rajeev Shukla ने भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि विदेशी लीग में भारतीय मालिकों वाली फ्रेंचाइजी के फैसलों में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की कोई भूमिका नहीं होती। इस बयान से यह साफ हो गया कि यह पूरी तरह फ्रेंचाइजी का निजी निर्णय था।
क्रिकेट और राजनीति के बीच बढ़ती दूरी
गावस्कर के बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या क्रिकेट को पूरी तरह खेल तक सीमित रखा जाना चाहिए या इसमें राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। जहां एक पक्ष इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और भावनाओं से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे खेल की स्वतंत्रता और पेशेवर निर्णय का मामला मानता है।

